Monday, June 22, 2009

Meri duniya

इस दुनिया में लाखों लोग रोज जन्म लेते हैं और हजारों मौत की आगोश में सो जाते.ये चक्र सदियों से चलता आ रहा है और सदियों तक यूँ ही चलता रहेगा ।इंसान अपने जीवन में जीवित रहने के लिए कई काम करता है.ग़लत या फ़िर सही ,ये बाद की बात है। वह कई ऐसे भी काम करता है जिनसे दूसरों का भी भला होता है और कुछ ऐसे भी काम कर जाता है जिसमे सिर्फ़ उसका स्वार्थ छिपा होता है। उसका अपना एक तर्क होता है जिस के द्वारा उसे वह सही सिद्ध करने का प्रयास करता है । एक ही समाज के अंग होते हुए भी इतनी विविधता ? अजी समाज को छोडिये , एक परिवार की भीतर आप ये असामान्य बात का अनुभव कर सकते हैं। ऐसा क्यों है? क्या विचारों में समानता लाना इतना कठिन हो चला है ? हम क्यों नहीं मै से पहले हम के बार में सोचते हैं ? स्वार्थी होना बुरी बात नहीं , बस थोड़ा उसके दायरे को फैलाना है , जिससे की उसमे वो भी आ जायें जिनके बारे में कभी कभी ही सही , हम सोचते ज़रूर हैं। है ना? मै हूँ मोतीलाल ठाकुर । स्वागत है आपका , मेरी दुनिया में.